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Saturday, 24 December 2016

पिता का उपहार


एक बहुत ही श्रीमन्त उद्योगपति का पुत्र कॉलेज में अंतिम वर्ष की परीक्षा की तैयारी में लगा रहता है,
तो उसके पिता उसकी परीक्षा के विषय में पूछते है तो वो जवाब में कहता है की हो सकता है कॉलेज में अव्वल आऊँ, "अगर मै अव्वल आया तो मुझे वो महंगी वाली कार ला दोगे जो मुझे बहुत पसन्द है..?"

तो पिता खुश होकर कहते हैं क्यों नहीं अवश्य ला दूंगा। ये तो उनके लिए आसान था उनके पास पैसो की कोई कमी नहीं थी।

जब पुत्र ने सुना तो वो दुगुने उत्साह से पढाई में लग गया। रोज कॉलेज आते जाते वो शो रुम में रखी कार को निहारता और मन ही मन कल्पना करता की वह अपनी मनपसंद कार चला रहा है।

दिन बीतते गए और परीक्षा खत्म हुई। परिणाम आया वो कॉलेज में अव्वल आया उसने कॉलेज से ही पिता को फोन लगाकर बताया की वे उसका इनाम कार तैयार रखे मै घर आ रहा हूं।

घर आते आते वो ख्यालो में गाडी को घर के आँगन में खड़ा देख रहा था। जैसे ही घर पंहुचा उसे वहाँ कोई कार नही दिखी। वो बुझे मन से पिता के कमरे में दाखिल हुआ

उसे देखते ही पिता ने गले लगाकर बधाई दी और उसके हाथ में कागज में लिपटी एक वस्तु थमाई और कहा लो ये तुम्हारा गिफ्ट।

पुत्र ने बहुत ही अनमने दिल से गिफ्ट हाथ में लिया और अपने कमरे में चला गया। मन ही मन पिता को कोसते हुए उसने कागज खोल कर देखा उसमे सोने के कवर में रामायण दिखी ये देखकर अपने पिता पर बहुत गुस्सा आया

लेकिन उसने अपने गुस्से को संयमित कर एक चिठ्ठी अपने पिता के नाम लिखी की पिता जी आपने मेरी कार गिफ्ट न देकर ये रामायण दी शायद इसके पीछे आपका कोई अच्छा राज छिपा होगा.. लेकिन मै यह घर छोड़ कर जा रहा हु और तब तक वापस नही आऊंगा जब तक मै बहुत पैसा ना कमा लू। और चिठ्ठी रामायण के साथ पिता के कमरे में रख कर घर छोड कर चला गया।

समय बीतता गया..
पुत्र होशयार था, होनहार था, जल्दी ही बहुत धनवान बन गया शादी की और शान से अपना जीवन जीने लगा कभी कभी उसे अपने पिता की याद आ जाती तो उसकी चाहत पर पिता से गिफ्ट ना पाने की खीज हावी हो जातीवो सोचता माँ के जाने के बाद मेरे सिवा उनका कौन था इतना पैसा रहने के बाद भी मेरी छोटी सी इच्छा भी पूरी नहीं की। यह सोचकर वो पिता से मिलने से कतराता था।

एक  दिन उसे अपने पिता की बहुत याद आने लगी। उसने सोचा क्या छोटी सी बात को लेकर अपने पिता से नाराज हुआ अच्छा नहीं हुआ। ये सोचकर उसने पिता को फोन लगाया बहुत दिनों बाद पिता से बात कर रहा हु। ये सोच धड़कते दिल से रिसीवर थामे खड़ा रहा

तभी सामने से पिता के नौकर ने फ़ोन उठाया और उसे बताया की मालिक तो दस दिन पहले स्वर्ग सिधार गए और अंत तक तुम्हे याद करते रहे और रोते हुए चल बसे

जाते जाते कह गए की मेरे बेटे का फोन आया तो उसे कहना की आकर अपना व्यवसाय सम्भाल ले। तुम्हारा कोई पता नही होनेसे तुम्हे सूचना नहीं दे पाये।

यह जानकर पुत्र को गहरा दुःख हुआ और दुखी मन से अपने पिता के घर रवाना हुआ

घर पहुच कर पिता के कमरे जाकर उनकी तस्वीर के सामने रोते हुए रुंधे गले से उसने पिता का दिया हुआ गिफ्ट रामायण को उठाकर माथे पर लगाया और उसे खोलकर देखा

पहले पन्ने पर पिता द्वारा लिखे वाक्य पढ़ा जिसमे लिखा था "मेरे प्यारे पुत्रतुम दिन दुनी रात चौगुनी तरक्की करो और साथ ही साथ मै तुम्हे कुछ अच्छे संस्कार दे पाऊं..  ये सोचकर ये रामायण दे रहा हु",
पढ़ते वक्त उस रामायण से एक लिफाफा सरक कर नीचे गिरा जिसमे उसी गाड़ी की चाबी और नगद भुगतान वाला बिल रखा हुआ था।

ये देखकर उस पुत्र को बहुत दुख हुआ और धड़ाम से जमींन पर गिर रोने लगा।

हम हमारा मनचाहा उपहार हमारी पैकिंग में ना पाकर उसे अनजाने में खो देते है।

पिता तो ठीक है। इश्वर भी हमे अपार गिफ्ट देते हैलेकिन हम अज्ञानी हमारे मनपसन्द पैकिंग में ना देखकर, पा कर भी खो देते है।

हमे अपने माता पिता के प्रेम से दिये ऐसेे अनगिनत उपहारों का प्रेम का सम्मान करना चाहिए और उनका धन्यवाद करना चाहिये।


Saturday, 5 November 2016

Each Gives What He/She Has

Back in the days when Germany was divided, a huge wall separated East and West Berlin. One day, some people in East Berlin took a truck load of garbage and dumped it on the West Berlin side.

The people of West Berlin could have done the same thing, but they didn't. Instead they took a truck load of canned goods, bread, milk and other provisions, and neatly stacked it on the East Berlin side.

On top of this stack they placed the sign:

EACH GIVES WHAT HE HAS"

How very true! You can only give what you have. What do you have inside of you?
  • Is it hate or love?
  • Violence or peace?
  • Death or life?
  • What have you acquired over the years?
  • Is it the capacity to build or capacity to destroy?
  • Is it the ability to make money or steal money?
  • Is it ingenuity to develop good things that will benefit mankind or ability to bomb those good things that others have labored to build?

EACH GIVES WHAT HE HAS"


Thursday, 1 September 2016

What You Sow, You Reap


Once upon a time there was a small time business man from a small village who used to sell butter in the nearby town. 

A big shop owner in the town was his regular customer. The villager used to deliver every month the shop owner the required butter in 1 kg. blocks and in turn he used to get grocery items like sugar, pulses, etc., from the big shop owner.

Once the shop owner decided to weigh the butter and to his surprise every block of butter weighed 900 grams instead of 1 kg.

Next month when the villager came to supply butter, the shop owner was very angry at him and told to leave the shop.

To this the villager replied him courteously, "Sir, I am a very poor villager, I don't have enough money to even buy the required weights for weighing the butter, I usually put the 1 kg sugar you give me on one side of weighing scale and weigh butter on another side."

This simple story very beautifully illustrates that what we give to others comes back to us.